दोहा

नमो-नमो गुरुदेव को, शीश निवांऊ हर बार।

नैया के खिवैया बन करो, भवसागर से पार।।

बुद्धि हीन को ज्ञान दो, मैं समरूं बारम्बर।

ऋद्धि -सिद्धि गुण देत हैं, गुरु विद्या के भंडार ।।



-:चौपाई:-

जय गुरुदेव ज्ञान गुण सागर। ब्रह्मा विष्णु महेश नट नागर।॥।

दयानिधि दीनन हितकार्री भंजन मोह विनाशक हारी।।

सभी क्टों को हरने व हृदय में भरने वाले।॥।

तुमरी सुरत मन अ-जन्म के दुख बिसरावै।।

बूली पुत्र नेकी सुत नामा। मनन भजन से मिलगे श्याम।।

चन्दा जैसी शीतल काया। भानू सा प्रकाश फैलाया।।

सेवा गुरु की खूब बजाईं। बाल भक्त की पदवी पाई।।

मात पिता के आज्ञाकारी। गुरु सेवा से अगत सुधारी।।

अष्ट ग्रह का पूजन कराया। सत्संग का रंग खूब चढ़ाया॥।

पर उपकार की सुरती धारी। यश गाते हैं नर और नारी।॥।

शिक्षा की जो बेल लगाई। अपने हाथों नींव जचाई।।

कष्ट निवारण दुख हरैया। भवसागर से पार करैया।।

जो सुनता तुमरी रस बाणी। मन की मिटज्या सभी गिलानी।।

संकट से गुरु देव छुड़ावै। मन कर्म वचन ध्यान जो लावें।।

तुम उपकार प्रजा का कीन्हां। सन्त रसायन से सुख दीन्हा।।

सब सुख होवै तुम्हारी शरना। सन्त रक्षक काहू को डरना।।

गूंगे को तुम देते बाणी। अन्धे ने सब चीज पहचानी।।

बहरे के दिये कान खुलाई। सन्त दया से दिया सुनाई॥।

सन्त प्रेम का जो लूटै लटका। विष्न क्लेश मिटै सब खटका।॥।

जहां सन्त जी की मुरती होती । वहीं गुरु जी की सुरती होती ॥।

सत्संग का प्रसाद जो खावै। कष्ट मिटै आनन्दी छाते॥।

सोच मनोरथ जो कोई आवै। सन्त कृपा से वही फल पावे।॥।

जिन पर कृपा सन्त जी की होती । खिले ज्ञान की मन में ज्योति ॥।

दास जनों के संकट टारे। दुखी जनों के कष्ट निवारे॥।

मन का करे अर्धियारा। सन्त मनन से हो उजियारा॥।

भूत पिशाच निकट नही आवे । सन्त चरण में जो ध्यान लगावे।॥।

विद्या वान गुणी अति चातुर। परोपकार करिवे को आतुर॥।

जो गावै तुमरी यश गाथा। बसि बैकुण्ठ मोक्ष मिल जाता।।

सन्तों में जो श्रद्धा रखे। सेवा से मेवा फल चखे॥

जिसने जोत तुम्हारी लाई। नहीं देर हो तुरन्त सहाई।॥।

तन का ताप सभी मिट जावै। सन्त कथा जो निशिदिन गावे॥।

सन्त नाम की जो माला जापै। भय का भूत दूर खड़ा कांपे॥।

चमत्कार से नाम चमत्कारी । कलियुग में सन्त की पदवी धारी॥।

तुमरे नाम नाम से हो आशा पूरी । मन वांछित फल मिले जरूरी ॥।

सुख सम्पदा के तुम भंडारी। पूजा नित जो करे तुम्हारी।

नाम तुम्हारा कष्ट हरैया। मंगल का प्रकाश करैया।।

जिस घर हो तुम्हारा प्रकाशा। संकट हटै मिटे सब त्रासा ।।

कामना पूरीं सब हो जाती। ही “चमत्कारी सन्त हिंमाती।।

जो यह पढ़े सन्त चालीसा। सुख सम्पत्ति सब धन दे ईशा।।

यह नित्य नियम पाठ कर जोई। रोग दूर हो महासुख होईं।।



-:दोहा:-

मंगल कारण संकट हरण,काटो विघ्न क्लेश हरे।

संतनन की छवि हो भली , मेरे हर्दय बसों हमेश।।



भजन-239

( तर्ज:- सादा )

टेक:- प्रथम सतगुरु देव मनाईये, मनवांछित फल इनसे पाइए।

1. विघ्न हरन मंगल के दाता, गुरु जी ब्रह्म के हो सै ज्ञाता

ब्रह्म विष्णुं देव मनाईये। प्रथम:.....

2. महिमा इनकी सकल जगत मे कर राखै सब देवन वश मे

चमत्कारी गुरुदेव मनाइयें । प्रथम:.....

3. सत्संग में आ शाम सवेरी, परमगति हो ज्यागी तेरी

ब्रह्मचारी गुरुदेव मनाइये । प्रथम: ...,

4. श्री गुरूदेव जी करें ऐलान हैं, सत्संग से मिलते भगवान हैं।

हम सब के गुरुदेव मनाइ़ये । प्रथम: ...



-:शुभ कल्याणकारी प्रार्थना:-

सुबह शाम जिसको प्रभु ध्यान होगा

बड़ा भाग्यशाली वह इंसान होगा

हर दम लग्न तेरी उसी को होगी

कि जिस पर टु खुद मेहरबान होगा

जिसने भी तुझ को हरदय में टटोला।

लगा खाक तन में क्यूं हैरान होगा ।।

जिस जगह पर चर्चा हर दम तेरी होगी ।

कि बैकण्ठ सा ही वह अस्थान होगा।।

तू पी प्रेम प्याला क्यूं बेचैन होता ।

इसे वो पिये जो कदरदान होगा।।



भजन-135

( तर्ज:- आज रल मिल कट्टी सारी ) |

टेक:- हम विनती करते बारम्बार, यह सत्संग सुखदाई हो।

1. सत्य प्रेम का दीपक जलज्या, आनन्द रूपी फूल सा खिलज्या।

टलज्या सारी विपत का भार, दिन दिन कला सवाई हो।

2. रोग दोष संकट मिटें सारे, अन्न धन के भरजां भंडारे।

जयकारे लावे नर नार, हर की आप सहाई हो ।

3. सत्संग में सनतों की माया, नहीं इस सौदे में घाटा आया।

मन चाहया फल मिलज्या तैयार, अपनी आप भलाई हो ।

4. चन्द्रभान सन्त की युक्ति, फेरो माला नाव ना रुकती।

कलियुग में मुक्ति आधार, सत्संग खास दवाई हो।

विनती करते बारम्बार...

कीर्तन ( 5 मिनट )

ॐ हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे।

हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे।।

प्रार्थना: ( 5 मिनट )

हे पूर्ण परमात्मा, पापों का करो खात्मा।

विश्व बने धर्मात्मा, हम सब तेरी आत्मा ।।



भजन-205

(तर्ज:- हम आकर शीश झुकाते हैं)

टेंक:- हैं देव तलक खुश हो जाते, गुरुदेव तुम्हारी पूजा से।

हम पावन गंगा में नहाते, गुरुदेव तुम्हारी पूजा से

1. तुम दाता दीन दयालु हो; और हम सब पर कृपालु हो।

हम मन चाहा फल है पाते, गुरु देव तुम्हारी पूजा से॥

2. तुम नाप जपाने वाले हो, हर दोष मिटाने वाले हो।

नहीं संकट से हम घबराते, गुरुदेव तुम्हारी पूजा से ।।

3. हो भूली वस्तु लखावनियां, गोबिन्द से आप मिलावनियां।

हम भजन कीर्तन ही गाते, गुरुदेव तुम्हारी पूजा से ।।

4. जो करते हैं तुमरी सेवा, उन्हें मिलती है अदभुत मेवा।

ठग पांचों पीछा दिखलाते, गुरुदेव तुम्हारी पूजा से ।।

5. जो सेवक तेरा पुजारी हो, कह चन्द्रभान नहीं हारी हो।

हम परम गति को हैं पाते, गुरुदेव तुम्हारी पूजा से ।।



दोहा

जो मन वचन क्रम से, रटते हैं श्री राम।

करें कृपा उन पर सदा, भगतों के सुख धाम ।।

भजन छ

टेक : चालो देन बधाई हे, है नेकी घर मे जन्मा लाल सै

1. पणवासी के आठ बजे थे, सब बाता के ठाठ सजे थे

कातिक की घड़ी आई है, हे 1975 का साल सै

2. धरती पै जब बढ़ पाप हे आवै खुद भगवान आप हे

करण धर्म की लड़ाई हे, हे जान्नु राजा छतरसाल सै

करण धर्म की लड़ाई हे, हे वै पाँचू पांडव साथ सै

3. श्यान शक्ल का प्यारा लागै, देख कै प्रेम दिलों में जागै।

आ गए कृष्ण कन्हाई हे, हे दुष्टों के लिए काल सैं।

आ गए कृष्ण कन्हाई हे, हे भक्तों के प्रति पाल सैं।

4. कौन से जन्म का फल तनै मिलग्या, घर में फूल कमल का खिलग्या।

म्हारा भी भाग पूर्वला जगग्या, चन्दा जैसा सतगुरु मिलग्या।

हो खुश जननी माई हे, हे टु सब तरिया ए निहाल सै

5. युग-युग जीओ बालक थारा , धन माया का भरा भंडारा

युग-युग जीओ सतगुरु म्हारा, दुखियों के लिए एक सहारा।

ल्‍या दे म्हारी मिठाई हे, हे कित बूली धरा थाल सै।

6. कृष्ण लाल ब्राह्मण गावै, सतगुरु चन्द्रभान मनावै।

सत्संग मंडल गुण थारे गावै, सतगुरु चन्द्रभान मनावै।

गाव शब्द बधाई हे, हे म्हारा सतगुरु राखै ख्याल सै।



-: आरती: -

जय गुरुदेव दयानिधि दीनन हितकारी ।

जय-जय मोह विनाशक भव बन्धन हारी ।। जय देव

ब्रह्मा विष्णु सदा शिव गुरु मूरत धारी ।

बेद पुराण बखानत गुरु महिमा भारी ।। जय देव जय

जप तप तीर्थ संयम दान बहुत दीन्हें । |

गुरु बिन ज्ञान न होवे कोटि यत्न कीन्हें।। जय देव जय

माया मोह नदी जल जीव बहें सारे ।

नाम जहाज बिठा कर गुरु पल में तारे।। जय देव जय

काम क्रोध मध मत्सर चोर बड़े भारे।

ज्ञान खड़ग दे कर में गुरु सब संहारे ।। जय देव जय

नाना पंथ जगत में निज निज गुण गावें।

सब का सार बताकर गुरु मारग लावें। जय देव जय

गुरु चरणामृत निर्मल सब पातक हारी ।

वचन सुनत तुम नाशे सब संशय टारी ।। जय देव जय

तन मन धन सब अर्पण गुरु चरणनन कीजे।

ब्रह्मानन्द परम पद मोक्ष गति लीजे ।। जय देव जय

चार वेद छ: शास्त्र सबमें दर्शाया ।

शेष महेश रटत हैं पार नहीं पाया ।।

पांच चोर के मारन कारन नाम का बाण दिया। जय देव जय

प्रेम भक्ति से साधा भव जल पार किया।।

सतयुग त्रेता द्वापर नाना रूप लिया।

कलि काल भक्तन हित सन्त अवतार लिया।।

श्री सदगुरुदेव शरण में जो प्राणी आवै ।।

भव सागर से तर कर परम गति पावे।

जय गुरुदेव दयानिधि दीनन हितकारी। जय देव जय

जय जय मोह विनाशक भाव बंदन हितकारी ।

जय देव जय



सन्त चालीसा करने की क्रिया

यह क्रिया 40 दिन करनी है। इसमे प्रात नहाकर शाम को हाथ पाव धोकर श्री संत जी महाराज की जोत जगाकर पाठ करना है।

इस अवधि मे ब्रहमचार्य का पालन करना अति आवश्यक है। संयम से रहना है। तथा सादा भोजन खाए मादक वस्तुओ का सेवन नही करना है।

इस क्रिया के नियमानुसार करने से मनवांछीत फल की प्राप्ति होगी ओर रोग (ओपरा पराया ) दूर हो जाएगा।



-:समाज सन्त चालीसा पाठ की महिंमा -

सन्त समागम हरि कथा, तुलसी दुर्लभ दोय।

सुत दारा अरु लक्ष्मी, घर पापी के भी होय।।

घी के तो दर्शन भले, खाया भला न तेल।

बिगड़े काम संवार दे, यदि हो सनतों का मेल॥

मन वांछित फल पाइये, जा सन्तों के दरबार।

सन्त जनों की मेहर से, हो जाता बेड़ा पार।।

सन्त चालीस सुमरिन सै, मिटजां विघ्न क्लेश।

ताप हटें सब रोग कटें, करके पाठ हमेशा ।।

सन्त मूर्ति के आगै, रोजाना जोत जगा करके।

धूप दीप दे भजन करै, सच्चा ध्यान जाम करके।।

चालीस दिन का ब्रह्मचर्य, करना व्रत जरूरी हो।

दृढ़ निश्चय से पाठ करै, सभी मनोकामना पूरी हो।।

आसन लाकै ध्यान जमा, तन मन में शुद्धताई हो।

कष्ट हरैया दुख हरैया, सन्त जन स्वयं सहाई हों।।

भूत प्रेत छलावा नहीं, स्वपन में आएगा।

सन्त चालीसा पाठ करै, सो हर रोगी सुख पाएगा।।

लाख रोग की एक औषधि, सन्त चालीसा पाठ करें।

सब फंद कटैं आनन्दी छाज्या, प्रसन्न चित्त हो ठाठ करें ।।



-:मूर्ती स्थापना (प्राण प्रतिष्ठा) दिवस:-

गोहाना आश्रम, रेलवे कालोनी              : 09.02.1998

समालखा आश्रम                              : 31-01-2001

रिठाल आश्रम                                  : 20-06-2003

गिरावड़ आश्रम,बड़े जोहड़ पर            : 21-03-2006

गिरावड़ आश्रम (दूसरा)                     : 12-10-2008 (आसोज सुदी 13) विक्रमी संवत 2065

बिलासपुर आश्रम, उ० प्र०                   : 03-12-2008 (मंगसर सुदी 5) विक्रमी संवत 2065

बूढ़ा खेड़ा लाठर आश्रम,जीन्द             : 07-03-2010 (चैत सुदी 7) विक्रमी संवत 2066

गोहाना आश्रम(दूसरा),जीन्द रोड़         : 26-02-2012

भैणी धाम आश्रम कूंगड़ (भिवानी)         : 07-03-2010 (चैत सुदी 2) विक्रमी संवत 2071

गिरावड़ आश्रम (तीसरा धर)               : 08-08-2015

सोनीपत आश्रम गोहाना रोड               : 15-03-2020 (चैत बदी 7) विक्रमी संवत 2076

रोहतक आश्रम झज्जर रोड                : 24-07-2021(आषाढ़ सुदी 15) विक्रमी संवत 2078