भजन-91
( तर्ज:- दाग जिगर के धोने )
टेक: रोग दोष मिट जावै, सन्तां के संग में ।
1. कमी नहीं इस दर पै भाई, चीज मिलै यहां सब मनचाही। श्रद्धा से जो आवै, सन्तां के संग में।।
2. ठगनी दस की पेश चलै ना, पाप का लावा लेश मिलै ना। पांचों ठग घबरावें, सन्तां के संग में ।।
3. ब्रह्मा, विष्णु, शंकर प्यारे, तेतीस करोड़ देवता सारे। आकै दर्श दिखावें, सन्तां के संग में ।।
4. सन्तों में विश्वास करे जो, सेवा करके ख्यास करे जो। मोक्ष गति को पावें, सन्तां के संग में ।।
5. चन्द्रभान हो सन्त हिमाती, कर पूजा संशया मिट जाती। वेद पुराण बतावँ, सन्तां के संग में।। रोग दोष मिट जावें.....
दोहा: - सन्त समागम हरि कथा, तुलसी दुर्लभ दोय। सुत दारा अरु लक्ष्मी, पापी के भी होय।।
भजन-92
( तर्ज:- सादा )
टेक:- दीन दयाल दया के सागर दुख का करें सफाया। के पड़ जब सुध लें आकै जिसने रट्टा लाया।।
1. नाम लेन तैं पाप कटैं सैं लाखों पापी तारे। दुष्ठों का दिया खोज मिटा है अपने भक्त उभारे। परले पार उतरजां सैं नहीं राम भजनियां हारे। ऊंच नीच का भेद नहीं है दास जनों के प्यारे। दुर्योधन की मेवा छोड़ के साग विदुर घर खाया।।
2. कबीर भक्त की यज्ञ रचा दी बनकै नै भंडारी। सदन कसाई पार उतारे नाम रटा गिरधारी। धन माया के ढेर ला दिए सुदामा के बन यारी। रैदास कै घर में गंगा ल्यादी जाने दुनिया सारी। गज और गिरह लड़े जल भीतर गज का पिंड छुड़ाया।।
3. सिरसा गढ़ में भात भरा बन नरसी का गडवाला। दर्शन दे कै जिता दिया था ध्रुव भक्त का पाला। नरसिंह बन प्रहलाद भक्त खुद आके आप सम्भाला। धनना जाट और सैन भक्त का सारा संकट टाला। कर्णहार करतार वही है अजब निराली माया।।
4. संकट पड़ा द्रोपदी पै आके लाज बचाईं। नर्वदा, अनसुइया, गनका तारी मीरांबाईं। भिलनी की करी मनसा पूरी अहिल्या पार लगाईं। चन्द्राभान चल सन्त शरण में मिलजां कृष्ण कन्हाईं। संता कै दर पै जाके मिलता भगवान बताया।।
दोहा:- तात स्वर्ग अपवर्ग सुख, धरिये तुला एक अंग । तूल न ताहि सकल मिली, जो सुख लव सत्संग ।।
भजन-93
( तर्ज:- जा टूट भ्रम के ताले )
टेक:- तेरा हो ज्यागा निस्तारा, तूं रटना ला हरि नाम की।
1. दोनूं वक्तां शाम सवेरी हरे राम की रट माला । अन्दर ज्योति जग जाए खुद भीतर में ना रहै काला। सब मिट ज्यागा अंधियारा, तू रटना ला हरि नाम की।।
2. काम क्रोध मद्द लोभ तृष्णा बिल्कुल मन के मारे तैं। तुरिया पद में आसन लाकै सच्ची सुरती धारे तैं। तो मिलज्या मोक्ष किनारा, तू रटना ला हरि नाम की ।।
3. सहम नशे में गाफिल हो के करता मेरा-मेरा है। आज नहीं तो कल जाना यहां चिड़िया रैन बसेरा है। हो एक दिन कूच नगारा, तू रटना ला हरि नाम की।।
4. त्रिगुणी माया में फंस बन्दे ख्याल अगत का करा नहीं। आगे का सामान सफर का बांध जूड़ के धरा नहीं । तेरा क््यूकर होवै गुजारा, तू रटना ला हरि नाम की ।।
5. चंद्र्भान भरम का भांडा एक दिन चौड़े फूटैगा। सनतों की जा पहुँच शरण में बिल्कुल पैंडा छूटैगा। तेरा कष्ट मिटैगा सारा, तू रटना ला हरि नाम की।
दोहा : कलि केवल संसार में, और न कोए उपाय। साध संग हरि नाम बिन, मन की तपन न जाय।।
भजन-94
( तर्ज:- कर लो सोच विचार जिंदगी )
टेंक: बिछुड़ चले सब यार, मेला दो दिन का।
।. सब पड़ेंगे अपना रस्ता, मेला हो दो धेले सस्ता । सूना रहै बाजार, मेला दो दिन का।
2. असल प्रेम का गीत नहीं यहां, मन का सच्चा मीत नहीं यहां । है सब नकली प्यार, मेला दो दिन का।
3. नहीं साथी साथ निभाने वाले, ये पांचों दाव लगाने वाले । हर दम रहते तैयार, मेला दो दिन का।
4. जै अपनी खैर ज्यान की चाहने, क्यूं ना शरण गुरु की जावै। मिलज्या मोक्ष द्वार, मेला दो दिन का।
5. देख के मेला नीत फिरी है, पाप की सैया तेरी भरी हैं। डूबैगा मझधार, मेला दो दिन का ।
6. कह चन्द्रभान सन्तों का शरणा, ले कै पार निधि तै तिरणा। हो के देख सवार, मेला दो दिन का।
दोहा:- सहजो भज हरि नाम को, तज जगत की नेह। अपना तो कोई है नद्दी, अपनी सगी न देह।।
भजन-95
( तर्ज:- हे सत्संग के मां चालो )
टेकः- तनै मिलज्या परम गति हे इस राम नाम के है तैं।
1. तेरी सारी संशया मिटज्या, हे दुख का फंदा कटज्या। तेरे रोग दोष सब हट जां, हे सतगुरु धोरे जान तैं।।
2. जै राम राम जा गाया, तो होज्या मन का चाहया। तेरी हो ज्यागी शुद्ध काया, हे सन्त सोप के लान तैं।।
3. क्यूं वृथा जिंदगी खोवै, किसी भूल बीच में सोवै। तनै आगे का सुख होवै, इब थोड़ा सा दुख ठान तैं।।
4. जै सही भजन पै जचज्या, अंग-अंग में शयामा रचज्या। तो सोलह आने बचज्या, इन पांचों के घमशान तैं।।
5. यह चन्द्रभान बताते, सब सन्त मुनि समझाते। हैं पाप सभी धू जाते, कहैं सत्संग के में आन तैं।
भजन-96
( तर्ज:- हां ए कर ख्याल अगत का बहना )
टेक:- हां ए जै राम भजन पै डटज्या, तेरा सारा संकट मिटज्या।
1. मिल ज्यागी तनै मोक्ष गति हे, इसमें कोन्या झूठ रती है। _ हां ए चौरासी फंदा कटज्या, तेरा सारा संकट मिटज्या।
2. दो घण्टे का आसन लाले, अपने मन ने साफ बनाले। हां ए इन दूर पांच से हटज्या, तेरा सारा....
3. सतगुरु की करकै ने सेवा, मन चाही मिल जज मेवा। सी आ ए तेरा गुण औगुण सब छंटज्या, तेरा सारा...
4. तज दे झूठा भरम भरोटा, इस सौदे में कोन्या टोटा। हां ए तेरा बिल्कुल पूरा पटज्या, तेरा सारा....
5. चन्द्रभान ये सन्त बतावैं, तीन ताप ना धोरे आवै। हां ए जै हरे राम ने रटज्या, तेरा सारा... हां ए जै राम भजन पै डटज्या....
भजन-97
( तर्ज:- मेरा जूता है जापानी ) टेक :- भजले सीता राम, तेरे सिद्ध हो जांगे काम । जो ले गिरते न थाम, सच्चा नाम है वही ।।
1. राम नाम के सुमरन तैं मिटै, लख चौरासी फेरी। लाके फुरसत दो घड़ी हर, भज ले शाम सवेरी। तेरी मंजिल हो आसान, होज्या हिरदे के में ज्ञान तनै मिल जांगे भगवान, लाले ध्यान ने सही।।
2. करोड़ों बंध छूट कै बन्दे, नर तन है पाया। भजन हरि का करे बिना, बेकार तेरी हैं काया। ये माया सभी बिरानी, तेरे साथ नहीं है जानी। सुनले राम कहानी, बाणी सनतों ने कही।।
3. सौदा सच्चा कर आगे का, इसमें टोटा के । मनसा वाचा कर्मणा से, नाम हरि का ले। दे साथी बनकै साथ, लाले सुरती दिन और रात ली तेरी टेर सुनै रघुनाथ, बनज्या बात जो फही ।।
4. चन्द्रभान कह नाम लेन तैं, रोग दोष सब टलज्या। मुक्ति पद का धाम मिलै, एक आनन्द ज्योति खिलज्या। तनै मिलज्या पर्चा खास, जै होज्या सन्तों का दास। चल सतगुरु के पास, पूरी आस हो रही ।।
भजन-98
( तर्ज:- हो ज्यागा कल्याण तेरा )
टेक:- सत् चित आनन्द धाम मिले तू ध्यान हरि का धर बन्दे। कोए नहीं रोकन आला जा पार निधि तैं तिर बन्दे।।
1. मोह माया में फूला क्यूं, यहां मद मस्ती में टला क्यूं। सब पिछले वायदे भूला क्यूं, या करदी कोड कसर बन्दे॥
2. यह लख चौरासी फेरा है, तू सहम विषयों ने घेरा है। यहां सब नकली डेरा है, तेरा असली वो है घर बन्दे।।
3. राम धुनी के गाए बिन, कहैं सच्चा ध्यान जमाए बिन। का शरण में जाए बिन, तेरा होगा नहीं गुजर बन्दे।।
4. ला राम नाम का जयकारा, तो मिट ज्यागा संकट सारा। _ कह चन्द्रभान हो निस्तारा, तू ले ने राम सुमर बन्दे।
भजन-99
( तर्ज:- गुरु चन्द्रभान के सत्संग कर )
टेक: ये होगी परले पार बाहण जिनने ध्यान हरि में लाया है।
1. तूं तज दे ने हेरा फेरी, यह दो दिन की मेरा मेरी। कुछ साथ चलै कोन्या तेरी, रह धरी धराई माया है।।
2. काम क्रोध ने छोड़ दिये, मद्य लोभ तैं नाता तोड़ दिये। खुद मोह तैं मुखड़ा मोड़ लिए, तेरा होज्या मन का चाहया है।।
3. हरे राम का ला रद्टा, तेरे आगे का धन हो कट्ठा। यह गुरुओं का पढ़ले चिद्ठा, जो वेदों ने दर्शाया है।।
4. कह चन्द्रभान सब हाल सही, जै सन्तों की तनै शरण लई। बन ज्यागी सब बात फही, क्यूं इतना दिल घबराया है।।
भजन-100
( तर्ज:- तेरे दरबार में गुरुदेव )
टेक:- हरि के नाम की भक्ति अन्त में काम आएगी। यह पूंजी खास है बहना, तेरे जो साथ जाएगी ।।
1. यह जग है रैन का सपना, यहां कोई नहीं अपना । जै होज्या राम का जपना, तो मुक्ति धाम पाएगी ।।
2. नहीं कुछ लागता खर्चा, तनै मिलज्या तुरत पर्चा। हरि के नाम की चर्चा, तेरा संकट मिटाएगी ।।
3. यह भक्ति पाप को खोज्या, दिलों के दाग को धोज्या। जै गुरुओं की दया होज्या, नहीं फिर मार खाएगी।।
4. कह चन्द्रभान मत घबरा, शरण सन्तों की बहना जा। राम के नाम की धुन गा, टेम ना फिर थ्याएगी।।
दोहा:- सद्गुरु की शरण में, मिले शील सन्तोष। जप तप ज्ञान अराधना, विवेक ज्ञान का कोष ।।
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