भजन-271

टेक:- हे जी, सत्संग में आइयो हो ज्यागी दूर बीमारी ।

1. सबसे पहले ध्यान धरूं मैं सतगुरु चन्द्रभान का । कमरे में जोत गुरु की दीपक चसता ज्ञान का । आगै चमत्कार तू सुनले मैल काढ़ कै कान का। ओपरे के इलाज ऊपर एकदम होज्या बुद्धि दंग । मन का रोग शनिचर छाया हो रहा हो चाहे अंग भंग। झाड़ा-बूटी कुछ ना देते आकै सुणलो सत्संग। हर दम कमरे में रहैं गुरु जी सत्संग में शक्ति तारी।।

2. अंधे-लंगड़े-लूले माणस मनैं गुरु के आते देखे। मुश्किल तैं आवें रोग कटावें अपने पायां जाते देखे। बहरे सुणते गूंगे माणस राग आनंदी गाते देखे। बालाजी के दूत-भूत आड़ हाथ जोड़गी देबी माईं। पीर कलंदर गिरी का मन्दिर आकै नाक रगड़ग्या भाई। सच्चे मन से जो कोए आवै उसकी होज्या कला सवाई। रोग-दोष तो सभी खत्म जब दीखै सूरत प्यारी ।।

3. सतगुरु चन्द्रभान मेरे ने मिल रहे सीताराम देखो। राम नाम से जो मुखड़ा मोड़े उसका भी अंजाम देखो। ब्राह्मण, बनिये जात हरिजन सबसे करते प्यार गुरु जी 12 बजे के बाद मिलैंगे करतेना इंकार गुरूजी। आकै नहालो रोग कटा लो त्रिवेन्नी की धार गुरुजी। कित गाम गिरावड़ भाग तेरे ईश्वर की लीला न्यारी।

4. गावण वाला सही निराला कोन्या बताया नाम भाई। एक दिन आया दर्शन पाया होगे थे सिध काम भाई। नही चीज की किमत जानै वो सै गिरावड़ गाम भाई। जहा भी जाउ तुमको पाउ चरणों के मै दास होज्या। गांधी जी नै कुछ भी ना दे तो फेर बी वास सुवास होज्या। ना सुंघै जो निंद मै उंघै उसका सत्यानाश होज्या। सत्संग मंदल ब्रह्मचारी का मै जन्म जन्म आभारी।

दोहा : दोष पराए सब लखै, सद्गुन्न लखै ना कोय। जो केवल सद्गुन्न लखै, दिन बंधु सम होय।

भजन 272

टेक: छोद्कर संसार जब तु जाएगा, कोय ना साथी तेरा साथ निभाएगा।

1. गर प्रभु भजन किया नासतसंग किया ना दो घड़िया । यमदूत लगाकर तुमको, ले जायेगे हथ कड़ियाँ| कौन छुड़ाएगा

2. इस पेट भरन की खातिर, तु पाप कमाता निश्दिन| श्मशान की लकड़ी मे रख कर, तेरे आग लगेगी एक दिन। खक हो जायेगा

3. सत्संग की गंगा है ये, तूं इसमें लगा ले गोता। वर्ना इस दुनिया से, तूं जाएगा एक दिन रोता। फेर पछताएगा

4. क्या कहता मेरा मेरा, यह दुनिया रैन बसेरा। यहां कोई न रहने पाता, है चन्द दिनों का डेरा। हंस उड़ जाएगा॥

5. अब सन्त चरण में निशिदिन, तूं प्रीत लगा ले बन्दे। कट जाएंगे सब तेरे, ये जन्म मरण के फन्दे। पार हो जाएगा॥ कोई न साथी तेरा साथ निभाएगा।।

दोहा:- आए थे सत्संग में, गये नींद में सोय। पारस में परदा रहा, कंचन किस विध होय।।  

भजन-273

टेकः- तेरी आनन्द होज्या काया, सुन गुरुवों का उपदेश हे।

1. गुरुवों का सुनले हेला, ये मानुष जन्म दुहेला। तेरा शब्द गुरु चित चेला, तूं रखिये याद हमेश हे।

2. एक गोल गुफा का घेरा, ना होती शाम सवेरा। उड़े खास गुरु रह तेरा, तेरे कटजां कर्म कलेश है।

3. कित भ्रम भूल में सोती, तेरे अन्दर जगरी ज्योति। धरा अलख नूर का मोती, तूं कर भीतर प्रवेश है।

4. गुरुओं को देख निराला, जित कोटि भान उजियाला कॄष्ण लाल रते जा माला, ना चालै काल की पेश हे

दोहा : कबीर साधु दर्श ते, साहिब आवै याद लेखे मै सोइ घड़ी बाकी के दिन याद  

भजन-274

 टेक:- खड़ा एक गरीब ब्राह्मण बाहर सुदामा नाम बतावै सै।

1. उसनै एक दम गया फेट में, करके आया खड़ा गेट में, दीखै ज्ञान घणा हुश्यार, तेज सरे आम बतावे सै ।।

2. उसकी सूख रही सै काया, भक्ति करके बदन सुखाया। रहा सै काम क्रोध नै मार, थारे तैं काम बतावै सै ।।

3. मेरी तुम करियो माफ खता जी, लाग्या लाया जिसा पता जी। वो थारे बालकपन का यार, न्यू हाल तमाम खतावै सै ।।

4. वो गुरु चन्द्रभान का चेला, बचपन तैं थारे धरे खेला। करे सै राम नाम प्रचार, गिरावड़ गाम बतावै सै ।।

दोहा:- सदा अखंड सुख दीजिए, पार बहा भगवान। यही प्रार्थना दास की, करो मोक्ष मम दान।।

भजन 275

 टेक:- जब सुना सुदामा नाम श्याम मुरली बजाना भूल गये

1. सुनकै नाम सुदामा का, मन आनन्द हुआ घनश्यामा का ना ख्याल करा सत्य भामा का, रुकमण के बोल फिजुल गये।

2. लगी प्रेम रूप की गोली थी, भरी भाज भगत की कौली थी। या प्रजा हो गई धौली थी, नन्द लाल नशे में टूल गए।।

3. पैरों के नुपुर तक टूट गए, तज राज काज को उठ गए। बंशी के स्वर सब छूट गए, पीताम्बर वस्त्र खूल गए।।

4. ये लीला बृज बिहारी की, श्री मन मोहन गिरधारी की । श्री कृष्ण लाल पुजारी की, सेवा से हम फल फूल गए।।

दोहा:- हरि हर आदिक जगत में, पूजै देव जो कोय। सतगुरु की पूजा किए, सबकी पूजा होय।।

भजन-276

टेक:- हे जी, हे जी तुमने सन्त सुणे हो चन्द्रभान। तन मन को भक्ति में भे लिया है हृदय में ज्ञान ।।

।. गाम गिरावड़ रोहतक के में ला० नेकी राम हुए। साल 75 कातिक के में पूर्णमासी धाम हुए। जैन धर्म में पुत्र जन्में उनके सिद्ध काम हुए। भक्ति रेखा खिंची हुई घर पर गंगा धाम हुए। पिता गुजरगे याणे से के सिर पर राधेश्याम हुए। चन्द्रभान ब्रह्माचारी बणगे दुनिया में सर नाम हुए। कमरे के में गीता बचती, है गोबिन्द में ध्यान।। है जी...

2. रामकिशन को गुरु मान के उनके धोरे जाण लागे। सुबह शाम स्नान कर प्रभु के गुण गाण लागे। बूली देवी माता जी की घर पर टहल बजाण एक एक पैड़ी चढ़ते रहे भक्ति का फल ही जग गुरु वचन का पालन करकै ध्यान हरि में लाण का । काम क्रोध मद लोभ छोड़ के न सत्संग चाहण लागे। घोर तपस्या करी सन्त ने, आण मिले घनश्याम।। है जी...

3. भक्ति के में लीन हुए राम मिलन की तृष्णा जागी। खाना पीना छोड़ दिया दसों इन्द्री मोश बिठा दी। चांदरायण व्रत किए ऐसी सुरती हर में ला दी। श्री कृष्ण के दर्शन होगे आशा तृष्णा मन से भागी। मौन व्रत धार के ने मन की इच्छा सारी त्यागी। गुरु आश्रम धाम बनाया फेर बौहड़ के किस्मत जागी। दूर-दूर से प्रेमी आवं, छोड़ जरूरी काम।। हे जी......

4. उस प्रभु के दर्शन होगे घर पर रह कर रटना लाई। कुए जोहड़ खुदा करकै ने गाल भी पक्की करवाईँं। आशीर्वाद दिया बच्चों को विद्यालय की नींव जचाईं। गंगा जमना सरस्वती हृदय में त्रिवेणी पाई। रोग कैटैंगे सारे तेरे गुरु के दर्शन कर मेरे भाई। सतगुरु के दरबारा मैं बिन पैसे कि मिलै दवाई । सत्संग के में जाके बैठज्या, बढ़े ज्यागी तेरी शान, हैं जी...

5. गुरु समाधि ऊपर आकै यज्ञ हवन तप करते रहे जल वायु आकाश पृथ्वी सबकी शुद्दि करते रहे धर्म का प्रचार किया 24 घन्टे फिरते रहे। स्वर्ग धाम बना धरती पै फूल चमन में खिलते . । वहां पर सत्संग होने लाग्या दुखियों के दुख हरते रहे। हरि भजन के लच्छे करकै हृदय के मां धरते रहे। वातावरण बदल गया वहां का, नहीं मिला आराम ॥। हे जी...

6. जो भाई घणी दूर रहते नहीं मिलन की आस हो तो। सुबह शाम कर धूप दीप जै फोटो तेरे पास हो तो। चिट्टी गेर नमस्ते लिख दे मन के अन्दर ख्यास हो तो। सुपने के में दर्शन होंगे हदय के में प्यास हो तो। आत्मा हो साफ और जै पक्का विश्वास हो तो। गारन्टी लिख कै दे दूं जै नहीं दुखों का नाश हो तो। अमीसिंह कर भजन हरि का, कटजां रोग तमाम ॥। हे जी, हे जी तुमने सन्त...

दोहा:- साधु ऐसा चाहिए, दुख दुखावे नांहि। पान फूल छेड़े नहीं, रह बगीचे मांहि।।

भजन-277

टेक:- आं रै तनै के मिलज्यागा मूर्ख निन्‍्दा मेरी तेरी में ।।

1. करकै निन्दा खुशी हुआ मन में, हाथों आग लगाई बण में। एक दिन आ बीतैगी तन में, डोबन दिया हेरा फेरी नै।।

2. पापी पाप करे तैं फूलै, पीकै भांग नशे में टूलै। ईश्वर एक खोट ना भूलै, एक दिन आज्या घेरी में ।।

3. इतने रहता पुण्य का पहरा, नीचे पाप दबा रह गहरा । वहां पर खूब देखिए लहरा, पीछा छूटै देरी में ।।

4. कह हरिसरूप जगत दे सीटी, मतना छोड़ो धर्म की नीति। वहां पर होगी खूब 'फजीती, सच्चा न्याय कचहरी में ।।

दोहा : हरि की भक्ति सौ वर्ष, गुरु भक्ति पल चार। फिर भी नहीं बराबरी, स्तन किया विचार ।।

भजन-278

 है रै थक जांगे पोरस तेरे, उस दिन रोवैगा । उस दिन रोवैगा, रै उस दिन रोवैगा ।।

1. आया बुढ़ापा ढंग बिगड़ग्या दूर खटोली गेरी। कल मरता चाहे आज मरो या सबने माला फेरी, उस दिन...

2. बेटा-बेटी, पोता-पोती गमा-गमी के तेरे। एक दिन वा भी धोरा धरज्या साथ लिए थे फेरे, उस दिन...

3. कानां बहरा सुणता कोन्या चक्षु हुए अंधेरे । जब गलियां में ठोकर लागै टूटैं हाड बडेरे, उस दिन...

 4. तू मरा ना तेरी रांद कटी ना कित कागज लुहकगे तेरे। सारा देश पानी का भरग्या के अंठगे कूए झेरे, उस दिन...

5. भाई रंग महल को छोड़ चला तेरे हों जंगल में डेरे। कह मंगलानंद भजो हरि को यही विधि के फेरे, उस दिन...

भजन-279

( टेक: मेरे नटवर नन्द किशोर, बताओ कब आओगे।।

1. श्याम तुम्हारे पै मेरी अरजी, नहीं आवो तो थारी मरजी मेरा कुछ ना चालै जोर, बताओ कब आओगे।

2. कब सी तुम्हारे मैं दर्शन पाऊं, नहीं आवोगे तो प्राण गवांऊ। मैं रो रो मचा दूं शोर, बताओ कब आओगे।

3. डगमग डोल रही मेरी नैया, तुम बिन कृष्ण कौन खिवैया। थारे हाथ में डोर, बताओ कब आओगे।

4. रात कार्टू दिन कटता कोन्या, मन डांटू दिल डटता कोन्या। उठैं प्रेम की लोर, बताओ कब आओगे।

5. किसे नै मात पिता का सहारा, मनै तो एक कृष्ण प्यारा। मेरे कालजे की कोर, बताओ कब आओगे।

6. पागल कह मनै "रा जमाना, मैं तो तुम पर हुई दिवाना। जैसे चांद चकोर, बताओ कब आओगे।

7. मीरां के प्रभु गिरधर नागर, कर लो अब तो मन का जागर। सुनियो करकै गौर, बताओ कब आओगे।।

भजन-280

 ( तर्ज:- सावन का महीना है

टेक: ओम नाम उस परमपिता का क्यूं भूल गया अहसान। हे रै जो वचन भरे थे वो करले याद जुबान ।।

1. गर्भ कुण्ड भें पड़ा हुआ था तनै दिखे घोर अंधेरा। न्यू बोला में बाहर काढ़ दे यो जी दुख पा रहा मेरा। बैठा भजन करूंगा तेरा, मेरे इब लागग्या ज्ञान। है रै जो

2. बालापन हँस-खेल गंवाया फेर आगी मस्त जवानी। न्यूकह था मैं धर्म करूंगा नित पाप करे अभिमानी। एक दिन जांगी छूट प्रानी, हों धर्मराज कै ब्यान। है र,..

3. गृहस्थ आश्रम में फंस के ने घिरा माया के चक्कर में। लूट-लूट कै माल बिराना तनै ठाढ़ा भर लिया घर में । नीत रही ना भजन करण में, तनै कुबध करी रे बेईमान। है रै...

4. आया बुढ़ापा तेरी काया में भाई 100-100 रोग लागगे। करनी के फल पड़ें भोगणो तेरे जाये भी दूर भागगे। कबीरदास न्यू कहण लागगे, मनैं जल्दी ठा भगवान। है रै...