भजन-251
टेक:- हो दुःख भंजन नाम तेरा, हो मेरा कष्ट गुरु जी हर जाइये।
1. हो तनै ब्रह्मा विष्णु ध्यावें, हो ना वेद भेद तेरा पावं। हो आनंद का धाम तेरा, हो मेरा कष्ट गुरु...
2. हो मेरी कटती रैन नहीं सै, तेरे दर्शन बिना चैन नहीं सै । हो दुःख हरना काम तेरा, हो मेरा कट गुरु...
3. हो तुम दीनन के हितकारी, हो मैं दीन दुःखी बड़ा भारी। हो दया करना काम तेरा, हो मेरा कष्ट गुरु...
4. हो गुरु चन्द्रभान शरण में, हो रहा कृष्ण खेल चरण में हो ले राखा नाम तेरा, हो मेरा कष्ट गुरु.....
भजन 252
टेक:- प्रेम बिना ईश्वर ना मिलता कितने जतन बना। गंगा रे जमना चाहे तू सरस्वती नहा।।
1. पांच साल की बाल अवस्था बिठा दिया था गा में-होली में। नहीं मरा तो दुष्ट पिता ने खम्ब भरा दिया कौली में -कौली में। वो दुष्ठ मार दिन धौली में, लिया अपना भगत बचा ॥
2. कैसी खीर परोसी थी उस भिलनी बुढ़िया माई ने-माई ने। बेर खुवा के वश में करगी रामचन्द्र रघुराई ने-रघुराई ने। | हृदय की प्रेम सफाई ने, वा दी बैकुण्ठ पठा।।
3. ढाई मुट्ठी चावल में बता कया थी ऐसी शक्ति रे-शक्ति रे। कदली के छिलके भी खाये वा देखी निर्मल भक्ति रे-भक्तिरे। है देखी प्रेम जोत जगती रे झट दिये चीर बढ़ा ।।
4. सौरन जैसी काया थी क्यूं खाक रमाली तन में रे-तन में रे। देख हीये की आँख खोल क्यूं फिरता है बन-बन में रे-बन में र। फ इस मन्द बुद्धि कृष्ण में प्रेम, गुरु चन्द्रभान जगा।। गंगा रे जमना चाहे... ।
भजन-253
टेक:- मनै राज भवन में, जा लेण दे, दो बात करूंगा कृष्ण तैं
1. क्यूं समझे मैंने भिखारी से, मेरी कृष्ण गेलां यारी सै। मनै बात बता दी सारी सै, दो बता करूंगा कृष्ण तैं। राज भवन में जा लेण हे...
2. मैं भूलूं कोन्या शान तेरा, तूं ले ने कहना मान मेरा। मरने कोन्या चाहिए दान तेरा, दो बात करूंगा कृष्ण तैं। मने राज भवन जा लेण दे...
3. तूं क्यूं मन में घबरा रहा सै, कह यार सुदामा आ रहा सै। मेरा मिलने नै जी चाह रहा सै, दो बात करूंगा कृष्ण तैं। मनै राज भवन में जा लेण दे..
. 4. गुरु चन्द्रभान बतावैगा, वो सुन ते ही भाज्या आवैगा। मनै प्रेम सहित ले जावेगा, दो बात करूंगा कृष्ण तैं। मनै राज भवन में जा लेण दे... दोहा: माया आनी जानी है, नर तजदे इसका मान। दान धर्म के करने से, तेरा हो जाए कल्याण ।।
भजन-254
टैक:- बता मेरे यार सुदामा रै, भाई घणे दिनां में आया।
1. बालक था जब आया करता, रोज खेल के जाया करता । के तकरार सुदामा रै, भाई घणे...
2. मनै सुणा दे कुटम्ब कहानी, क्यू कर पड़गी ठोकर टोटे की मार सुदामा रै, भाई घणे...
3. सब बच्चों का हाल सुणा दे, मिश्राणी की बात बता दे क्यु गया हार सुदामा रै, भाई घन्ने दिना मै आया
4. चाहिये था तनै पहलम आणां, इतना दुःख नहीं शा ठाणा। क्यूं भूल्या प्यार सुदामा रै, भाई घणे...
5. इब भी आग्या ठीक बखत पै, आज्या बैठज्या मेरे तख्त थै। जिगरी यार सुदामा रै, भा भाई घणे...
6. आज्या भगत छाती कै लाल्यूं, इब बता तनै कड़े बिठाल्यूं। करूं साहूकार सुदामा रै, भाई घणे...
7. गुरु चन्द्रभान के दर पै आ कै, भजन कीर्तन हर के गाके करूं प्रचार सुदामा रै, भाई घणे दिनां में आया। बता मेरे यार सुदामा रै भाई घणे...
भजन-255
टेक:- म्हारे जागे पूर्वले भाग सतगुरु की हम पर मेहर फिरी।
1. जब मालिक की मेहर फिरी तो मानुष तन है पाया। बिठा पास में सतगुरु जी ने सारा भेद बताया। म्हारा लाया प्रभु में ध्यान सुना के बाणी खरी-खरी।।
2. घोर अंधेरा था म्हारे दिल में ना राम नाम का ध्यान। बता रास्ता म्हारे सतगुरु ने कर दिया हृदय ज्ञान। म्हारा दूर करा अज्ञान रटा कर इनने हरि हरि।।
3. तीन ताप की लगी बीमारी सारी देंगे काट। जिस पर मेहर फिरै सतगुरु की खुलैं हदय के पाट। मेटैं जन्म मरण के पाप बना दें धुर की टिकट फरी॥
4. चंद्र्भान गुरु म्हारे नै मेटी भागा-दौड़। जगदीश कह तुम रहो शरण में और नहीं कोई ठौड। हमने इन पै से घणी मरोड़ ये आकै लेंगे खबर म्हारी। म्हारे जागे पूर्वले भाग सतगुरु की हम पर मेहर फिरी॥
भजन-256
टेक:- माया का एक सिंह बनाया डाल कै उस में प्राण चले। लेन परीक्षा मोरध्वज की अर्जुन और भगवान चले।।
।. तीनों पहुँच गए रजधानी जा के अलख जगाते हैं। तीन रोज के भूखे हैं हम पहरेदार को बतलाते हैं। सुन के बात साधुओं की कहने को दरबान चले।।
2. जय हो महाराज की दो साधु द्वार आए हैं। दे तीन रोज के भूखे हैं और साथ में सिंह भी लाए हैं। सुन के बात साधुओं की राजा ले पकवान चले॥
3. भोजन खिलाना हो तो पहले सिंह को भोजन दो राजा। नरभक्षी है सिंह हमारा नर का ही मांस तुम दो राजा। गैर का सुत ना कटने पावै अपने पर कृपाण चले।।
4. सुत मारण से पहले एक बात सुनो महादानी । मी एक तरफ तुम पकड़ो आरा एक तरफ पकड़े रानी । आँखां में ना आंसू आवें आरा बीच दरम्यान चले।।
5. आज्ञा मान राजा ने अपने सुत पर आरा फेर दिया । अपने लाल के टुकड़े कर कै सिंह के आगै गेर ली । जाहिर कुछ ना होण दिया दिल में अनेक तूफान चले।।
6. अब खाएंगे भोजन राजा पांच थाल तुम सजवा लो। दे कर के आवाज तीन तुम अपने पूत को बुलवा लो। सुनकर बात साधुओं की राजा हो हैरान चले ।।
7. नाम रहैगा जग में रोशन जब तक चाँद सितारे हैं। हम सेवक श्री चन्द्रभान के जो सतगुरु देव हमारे हैं। दे कर के वरदान राजा को तीनों अपने धाम चले। लेन परीक्षा मोरध्वज की अर्जुन और भगवान चले ॥
दोहा:- अड्सठ तीर्थ गुरु चरण, पर्वी होत अखंड। सहजो ऐसा धाम नहीं, सकल अंड ब्रह्मांड।।
भजन-257
टेक:- रोहतक में सर नाम है, नाम गिरावड़ गाम है, यहां बिल्कुल सच्चा धाम है, गुरु चन्द्रभान ब्रहाचारी का ।।
1. गीता छन्द गायत्री का भाई बजै सुरीला साज यहां। रामायण की चौपाइयों की आवे मधुर आवाज यहां। दीपक चसते दिल में बसते सतगुरु सिर के ताज यहां। दूर-दूर से रोगी आबवैं दर्शन करें इलाज यहां। शुरु चन्द्रभान सन्त सै हे, जाणे सभी जगत से हे। यहां सुधरे तेरी अगत से हे, जा पैंडा छूट बीमारी का ॥
2. धूप दीप घी चन्दन की महकार अचानक उठज्या। देखोगे तस्वीर पवित्र भ्रम गात का टूटज्या। श्रद्धा और विश्वास राख विपता का चक्कर छूटज्या। कपटी बन के आवैगा तो तेरा चौड़े भांडा फूटज्या। मोह माया और काम तजो, सारी उमर आराम मजो, तुम हर दम राधेश्याम भजो, यो फर्ज कहैं नर नारी का ॥
3. जो कुछ लिखदी कहते हर ने रेख नहीं वा टाली जा। भगवान भक्त के वश में हों न्यूं तेरी बीमारी चाली जा। गंडा और ताबीज नहीं बस श्रद्धा मन में साली जा। इनका हो कै इनमें मिलज्या कौन कहै फिर खाली जा। जैसे उद्धव राधा प्यारी थी, वें गोपनी सभी कवारी थी। फिर तन मन धन सब हारी थी, न्यू प्रेम मिला गिरधारी का ।।
4. चालीस दिन पढ़ सन्त चालीसा करना हो उपवास तनै। पूरी मन की हो ज्यागी भाई जो सोची से आस तनै। सुबह शाम गुण गाने हों गुरु चन्द्रभान के दास तनै। सच्चे मन से ध्यान धरे तो मिलज्या पर्चा खास सने। कृष्ण लाल तू गाइये हो, मेरी पूरी बात निभाइये हो, मनै सेवा के में लाइये हो, मैं भूखा सेवा थारी का।। रोहतक में सर नाम है...
दोहा:- भय नाशन दुर्मति हरण, कलि में हरि को नाम। नानक जो निशि दिन भजे, सफल होय तेहि काम।।
भजन-258
( तर्ज:- रट तेरी माला गिरधारी )
टेक:- रटा करो गोबिन्द गिरधारी थारा होगा बेड़ा पार है भजा करो कृष्ण मुरारी करो काया का सुधार।।
1. धन्ना जाट सुना होगा जो नाम हरि का लिया करता। जो कोई साधु दर पे आज्या उसको भिक्षा दिया करता। करके नेक कमाई अपनी फिर वो खाया पीया करता। घर में थी कलिहारी नारी एक दिन उसने काम बताया। तोल कै ज्वार दे दी खेत के में बोण खंदाया। गाम गोरे साधु मिलगे ऐसी फिरगी हर की माया।
2. लिये धनना ने चरण चुचकार, आये भेष बदल करतार॥ साधुओं ने अलख जगाया भिक्षा का सवाल किया। सच्चा प्रेम दिखा कै उसने आधा बीज घाल दिया। करकै ने प्रणाम वो धनना खेत के में चाल दिया। और बीज लाया कोन्या घर बैठी कल्लिहारी नारी। कंकर और ज्वार मिलाकै बांध ओरना बो दी क्यारी। मोटे मोटे खूड काढ़ दिए हाँसण लागी दुनिया सारी। कहैं सब धनना मूढ़ गवार, नहीं काम करन का विचार॥
3. बेल जामी तूम्बे लागे होगी माया एक निराली। लोगा ने तमाशा होग्या देखन पहुँचे हाली पाली । बीर मर्द में हुई लड़ाई कलह करन लागी घर वाली। किसे ने भका दी एक दिन खेत ने संभालन आईं। फिर कै देखन लागी सारे तम्बे दिए दिखाई। छोह में भरकै उल्टी आगी एक तृुम्बा तोड़ लाई। दिया धनना कै सिर मार, गई घर में बिखर ज्वार।।
4. देखकै ज्वार चौधरन मन में खुशी मनान लागी। धना जा पहुँचा पोली में माफी मांगन जाण लागी। झगड़े और क्लेश छोड़ के हरि कीर्तन गाण लागी। देख कै प्रभु की माया सारा माजरा जाण लिया। उस दिन पीछे धनना जाट पक्का भक्त मान लिया। शर्मा जी करो भजन हरि का जिसनै अन्न का दान दिया। ऐसे हैं वो दातार, घर भर दिया बेशुम्मार।। रटा करो गोबिन्द गिरधारी... दोहा:- जाके रक्षक गुरु धनी, सके काह करि और। हरि रूठे गुरु शरण है, गुरु रूठे नहीं ठौर।।
भजन-259
टेक:- दादा रामकिशन न्यायकारी है, हे किसा सुन्दर बाग लगाया।
1. ब्रह्ललोक से या पौध मंगाई, बे माता मालन बन ल्याई। हर ने रच दी क्यारी है, हे सन्तां ने बीज बगाया।
2. आया था जब साल सतासी, फूल खिला एक बारामासी सुदी तीज बुधवारी है, हे फाल्गुन का मास बताया।
3. दस साल कर दी रखवाली, चन्दन रूख फूट आई तो । माली ने एटा िचारी है, हें सह लेगा धूप और छाया।
4. श्रद्धा के फूल भाव की बेली, प्रेम ज्ञान की जी चमेली, कैसी खूशबू आ रही हे, हे किसा हो रहा रंग सबाया।
5. दिन दिन दरखत सूखन लाग्या, माली का दिल दूखन लाग्या। भेज दिए गिरधारी हे, हे जब बत्तीस साल की थी काया।
6. कृष्ण लाल हवा जब चालै, चारों तरफ सुगन्धी डालै। होज्या दूर बीमारी हे, हे जो बाग बीच में आया।। दादा रामकिशन न्यायकारी...
दोहा:- बिन गुरु काहू न पाइया, कोटि जतन करै कोय। तन मन से गुरु सेविया, झटपट दर्शन होय।।
भजन-260
टेकः- भजन कर बन्दे, भजन कर बन्दे, भजन कर बन्दे, भजन हरि नाम का। भजन बिन तन यो तेरा नहीं रे किसे काम का।।
1. लाख चौरासी घूम के तू आया, जब जाके मानुष तन पाया। गफी में माया ले रहा तनै नाम रटा ना राम का।।
2. सातां की तनै करी रे गुलामी, उतपनां में हो रहा नामी। बदनामी का सिर सेहरा तूं दुश्मन होग्या गाम का॥।
3. कोन्या मानै तू शर्म लिहाज नै, अटका तो गेरा तने धर्म काज मैं! उस धर्मराज ने बेरा तेरी आच्छी बुरी तमाम का।।
4. खूब करी रै तने बेइन्साफी, इब भी सोच समझ ले पापी। तनै लूटा माल भतेरा तनै खाया सदा हराम का।।
5. एक पतला सा मिलज्या सेला, मेला छुटज्या तूं जागा अकेला। ना उठै पैसा धेला तेरे हाड मांस और चाम का।।
6. करले ने रे तू भजन बन्दगी, सत् का झाड़ू दे काढ़ गन्दगी। तेरा हो सुरपुर में डेरा फिर दर्शन हों घनश्याम का ।।
7. कृष्णलाल सेवक तूं गाइये, सतगुरु चन्द्रभान मनाइये। गिरावड़ में लाइये फेरा गुरु चन्द्रभान के धाम का।।
दोहा: श्री गुरु के सुमरिन मात्र से, नाशत विघ्न अनन्त। ताते सर्व आरम्भ में, ध्यावत हैं सब सन्त ।।
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